माझा कट्टा बदलतोय त्याविषयी लिहाव म्हणतो थोड़............

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रविवार, १५ जून, २०१४

asach kahitai awadalel !!!!!!!!

दिसे तो आजच्यापुरता खरा समजून घ्या
बदलतो रोज माझा चेहरा... समजून घ्या

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हा जीव असा जळलेला!
पण कुणास ना कळलेला!

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दिवे,चंद्र,तारे अता मालवू दे
नव्या जीवनाची निशा ज़ागवू दे

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गर्दीत आठवांच्या झाले उदास जीणे,
विसरू कसा तुला मी? थांबेल श्वास घेणे.

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उलटसुलट केले काळज़ाला ज़रासे
परत डिवचले मी वादळाला ज़रासे

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घेऊन मेघ आता येईल धुंद वारा
मी गीत आणतो, तू जुळवून ठेव तारा...

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